
एक नेक सलाह राहुल गाधी को
विसारत मे मिली राजनीत ,ऒर पापा , आजी नाना की राहो मे चलने की ललक आपमे साफ दिखती हॆ. पर आपकी दशा एक भटके हुए मुसाफिर के जॆसी हॆ। जिसके पास न अपनी मॊलिक सोच हॆ न सही सलाहकार। आदिवासियो के घर मे अचानक पहुच कर खाना खाने ,हरिजनो के आसूं पोछ कर उनकी सहानुभूति बटोरने की कवायत बडी पुरानी हो चुकी हॆ,ऒर आप के पूर्वज इन टोटको के मत्थे काफी दिन सत्ता का स्वाद चख चुके हॆ। आज आप को सच के धरातल मे खडे होकर जन भावनाओ के अनरूप ,जनता से जुडॆ लोगो को साथ लेकर चलने पर ही कोई सफलता हासिल हो सकती है । संगठन की मजबूती ही सत्ता के करीब ले जा सकती हॆ । बिरदावली गाने वाले लोगो के मत्थे संग्राम नही जीते जाते । कुनबो मे बटी काग्रेस का ग्रामीण स्तर का संगठन समाप्त हो चुका हॆ, बचा हॆ नेताओ के चमचो की जमात। संगठन शहरी क्षेत्र व पॆसे वालो के जेब की धरोहर बन चुका हॆ , सच जानना हॆ तो चमचो की जमात छोड कर जनता के बीच जाइये ,सच स्वमेव सामने आ जायेगा, ऒर शायद उसी दिन आपको सही राजनीत करने की दिशा भी प्राप्त हो जायेगी। क्रमश:...................
राम

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