बुधवार, 30 अप्रैल 2008

राहुल गांधी जी, जरा इनकी भी सुनिये...




राहुल गांधी के आदिवासी प्रेम के बारे में क्या सोचते हैं,इस समुदाय के नेता ?



खितौली की सभा के पश्चात मैने वही कुछ आदिवासी समुदाय के लोगो से बात की । काग्रेस पार्टी के विधायक रह चुके एक आदिवासी नेता का कहना था कि ''राहुल जी का यह कैसा आदिवासी प्रेम है , पंडित ,ठाकुरों को गले लगाकर आदिवासियों के हित की बात उठाते हैं । मंच पर उन्होंने किसी आदिवासी नेता को महत्त्व नही दिया । सारा श्रेय तो लूट लिया सामान्य वर्ग के मंचासीन नेताओं ने । जब की सभा मे भीड़ राहुल के नाम मे जुटी थी , और उन्हें इकठ्ठा करने मे हम लोगो का हाथ था ।अपने बदॊलत ये पाच सॊ आदमी भी इकट्ठा नही कर सकते हॆं। और दिखा ऎसे रहे थे,कि सारा किया धरा उन्ही का हो । ये पचौरी तो हम लोगो को महत्त्व ही नही देता,सिर्फ पंडितो को जानता है । संगठन और सत्ता में हमारी भूमिका खाना पूर्ति भर के लिए है । अभी चुनाव आ रहा है , हमे टिकट के लिए इन्ही लोगो की चमचागीरी करनी पड़ेगी । और जो इन्हे खुस कर लेगा,उसी आदिवासी को टिकट मिल जायेगी "। उनका कहना कि ”अगर राहुल गांधी वास्तव मे आदिवासियों का विकास चाहते हैं, तो उन्हें इस वर्ग के योग्य व्यक्तियो को आगे लाना होगा । आदिवासी सीटो मे पार्टी टिकट वितरण के समय उम्मीदवारों का चयन आदिवासी समुदाय के नेता करे, या फिर सोनिया गांधी खुद करे”। एक नेता जी का कहना था की इस बार गोडवाना गणतंत्र पार्टी को कम करके नही आका जा सकता ।



राम शर्मा

सोमवार, 28 अप्रैल 2008

राहुल जी,देश को बाट कर मत करिये राजनीत

राहुल जी,देश को बाट कर मत करिये राजनीत









'' देश मे दो हिन्दुस्तान ''?

राहुल गाधी

खितौली ग्राम मे एक सभा को सम्बोधित करते हुए राहुल गाधी ने कहा कि ”देश मे दो हिन्दुस्तान बन गए है। एक जो सम्पन्य है,जिनकी आवाज दिल्ली व भोपाल के गलियारो मे गूजती है , दूसरा हिन्दुस्तान आदिवासी , दलितों व पिछडो का है ,जिनकी आवाज आसानी से सुनाई नही देती'' ।

हिन्दुस्तान , भारत, इंडिया ये हमारे देश के नाम है ,इन नामो के संबोधन से पूरे देश की छवि हमारे सामने उभर आती है । हिन्दुस्तान शब्द ही देश का प्रतीक है । और हिदुस्तान दो? क्या कहना चाहते हैं राहुल गाधी । इनके व्यक्तब्य से तो लगता हॆ कि हमारा देश दो भागो मे बट चुका हॆ। राहुल जी देश , अमीरी गरीबी , जाति,भाषा , से नही,भावनाओं से बनता है । मिट्टी की खुसबू से उपजे रिश्तो की डोर मे बंध कर बना है ,यह हिन्दुस्तान । घर एक है ,घर मे रहने वाले लोगो के बीच बिवाद हो सकते है ,वे सुलझाए भी जासकते है ,विषमताये दूर भी की जा सकती है पर बटवारा .....ये शब्द ही रिश्तो की डोर तोड़ देता है । भगवान के लिए अब ये शब्द दुबारा अपनी जबान मे मत लाइयेगा । हम पहले ही बटवारे के चक्रवात से गुजर कर , आज तक उससे मिले दर्द की टीस को महसूस कर रहे है। यह कैसी राजनीत है ,कि वोट के लिए आप देश को वर्ग संघर्ष की आग मे झोक देना चाहते हॆं। आदिवासी ,दलित्त ,पिछडे वर्ग,अल्पसंख्यक के बदॊलत ही काग्रेस देश की सत्ता मे सबसे ज्यादा काबिज रहने वाली पार्टी है।काग्रेस की ग़लत नीतियों के चलते ही ये वर्ग उससे दूर होते जा रहे है। और उन्हें करीब लाने के लिए आप ने एक हिन्दुस्तान मे दो हिन्दुस्तान की घोषणा कर डाली। जवाहर लाल जी का ,जिन्ना को देश के प्रधानमंत्री के रूप मे स्वीकार न करने का परिणाम पाकिस्तान है । इंदिरा जी की नीतियों के परिणाम, पंजाब के आतंकवाद के रूप मे सामने आए । और अब आप देश को अगडो ,पिछडो मे बाट कर .........................?
देश मे व्याप्त विषमाताओ को दूर करने के लिए समाज मे आपसी सामंजस्य का वातावरण निर्मित करना होगा ।समस्या के समाधान का ठोस फार्मूला लेकर आइये ,लोग स्वमेव आप के साथ होगे ।

राम शर्मा

शनिवार, 26 अप्रैल 2008

भाजपा ने भ्रष्टाचार के साथ भी..........


मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार पहली बार प्रदेश मे अपना पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रही है । जनता के बीच बिजली, सड़क को मुख्य मुद्दा बना कर पार्टी चुनाव मे उतरी थी, और इन्ही मुद्दों के कारण इनकी भी सरकार जायेगी । एक काग्रेसी नेता का यह कथन '' मै मानता हू कि काग्रेस के कार्य काल मे भ्रष्टाचार का जन्म हुआ , पर बी.जे.पी.ने तो भ्रष्टाचार के साथ भी व्यभिचार किया '' सत्य प्रतीत होता है।



भाजपा के शासन काल को तो ऐसे कई कारणों से याद किया जायेगा, पर जनता के बीच इनकी सरकार के अलोक प्रियता के तीन प्रमुख कारण है ।



१-पंचायत स्तर के कार्यो मे हुआ भ्रष्टाचार -ग्रामीण अंचल मे हुए कार्य चाहे वह ग्राम सरपंच द्वारा कराये गये हो ,या प्रशासन अथवा ठेकेदारों द्वारा, भ्रष्टाचार का खुला खेल जनता ने अपनी आखो से देखा। भाजपा शासन काल मे सरपंच, सचिव साहूकार , शासकीय़ कर्मचारी जमीदार व भाजपा के नेता महाराज बन गए . पुरानी सडके नई के नाम से बना दी गई. कार्यो की गुणवक्ता पर कोई ध्यान नही दिया गया.


२-शासकीय कर्मचारियो की मनमानी- इस शासन काल मे शासकीय कर्मचारी लूट सको तो लूट वाली प्रथा का भरपूर इस्तेमाल करते नजर आ रहे हॆ. भाजपा के ऊपरी नेताओ का पूरा समर्थन इन्हे मिल रहा हॆ, जिसके कारण ग्रामीण स्तर के छुट-पुट विरोध की भी ये परवाह नही करते हॆ।


असंतुष्ट कार्यकर्त्ता- भाजपा का खासकर ग्रामीण अंचल का कार्यकर्त्ता भी नाराज हॆ, क्यो कि उनको प्रशासनिक स्तर मे कोई महत्व नही मिल रहा हॆ।


इन्ही कारणॊ से आगामी विधान सभा चुनाव मे भाजपा कि स्थिति अच्छी नही रहेगी। इसका लाभ काग्रेस को मिलेगा, ऎसा भी नही लग रहा । क्यो कि काग्रेस भी विपक्ष की सही भूमिका मे खरी नही उतरी है । साथ ही उनका जमीनी स्तर का संगठन न के समान हॆ। नई विधान सभा मे बहुजन, समाजवादी , गोणवाना गणतंत्र पार्टी, के साथ निर्दलीय विधायको की सख्या बढ़ सकती हॆ, ऒर सरकार गठन मे इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।


चलते - चलते मॆ यहाँ फिर उन्ही काग्रेसी नेता की एक ऒर टिप्पणी का उल्लेख कर रहा हूं , जिसमे उन्होने भारतीय जनता पार्टी के सम्बन्ध मे कहा हॆ कि, वोट मागते समय इनका नारा होगा, जय श्री राम , मतदान के वक्त कहेगें, देखो राम , मत गणना के समय बोलेगे, बचाओ राम ,परिणाम सामने आने पर अपने आप इनके मुख से निकलेगा, हाय राम-हाय राम


मॆ तो इतना ही कहूगा कि ये सब क्या हो रहा है राम


राम शर्मा

बुधवार, 23 अप्रैल 2008

शबनम मॊसी की भविष्य वाणी


शबनम मॊसी एक जाना पहचाना नाम, अभी हाल मे मेरी उनसे मुलाकात भोपाल मे हो गई। काफी बदली बदली नजर आई । राजनीत मे वापस लॊटने की इच्छा भी जाहिर कर दी। राजनॆतिक गलियारे के अनुभवो ने उन्हे काफी परिपक्व बना दिया हॆ। मेरे साथ गये मित्र का परिचय पूछा, जॆसे ही मॆने उनका नाम बताया मॊसी विचार मग्न हो गई ऒर मेरे मित्र के बारे मे सटीक भविश्य वाणी कर डाली। मॊसी के जोतिष ज्ञान से हम भी आश्चर्य मे पड़ गए । अपने बारे मे पूछा । फिर मैने कुछ नेताओं के बारे मे पूछा ,पहले तो मॊसी मुस्कुराई फिर बोली पूछो , मॆने शिवराज जी का नाम लिया तो वे हसी ऒर बोली उनका तो ठीक है पर उनकी पार्टी की नैया डगमग है कौन पार्टी प्रदेश मे सरकार बनाएगी के प्रश्न पर उनका कहना था कि काग्रेस ने प्रदेश का अध्यक्ष सही नही चुना है, पचौरी निकट भविष्य मे काफी बिवादित हो जायेगे ,तथा अपने निकटतम सहयोगी के कारण अध्यक्ष पद भी छोडना पड़ सकता है। आज पचौरी के विरोध के समाचार के कारण, मुझे उनके द्वारा की गई भविष्य वाणी याद आ गई । इसी दॊरान पचॊरी के नेत्रत्व मे काग्रेस बैतूल चुनाव भी हार चुकी है । देखे आगे कहा तक सच होती है मॊसी की भविष्य वाणी ।
राम शर्मा

सोमवार, 21 अप्रैल 2008

मध्य प्रदेश काग्रेस को अपनी आवश्यकता महसूस करा गये अर्जुन सिंह

मध्य प्रदेश काग्रेस को अपनी आवश्यकता महसूस करा गये अर्जुन सिंह










अवसर था इंदिरा गाधी राष्ट्रीय जनजातीय वि.वि.अमरकंटक, के शिलान्यास का.श्री अर्जुन सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा ''आमतौर मे विश्व वि. की स्थापना बड़े शहरों के आसपास किया जाना स्वाभाविक है। परन्तु हमने यह सब जानते हुए भी इंदिरा गाधी राष्ट्रीयजनजाति वि.वि.की स्थापना जनजातीय क्षेत्र मे करने का निर्णय लिया। इस सोचे समझे निर्णय के पीछे न केवल विकास की दौड मे पिछडे हुए लोगो को उच्च शिक्षा से जोड़ने का ध्येय रहा है ,न केवल इस क्षेत्र के युवा वर्ग के लिए उच्चतम स्तरीय शिक्षा एवं शोध के दरवाजे खोलने की चाह रही है, बल्कि साथ ही यह सुसंगत तर्क भी रहा है की यदि विश्वविद्घालयो का उद्देश्य उपलब्ध ज्ञान और विज्ञान की संभावना को बढाना और नए ज्ञान की खोज करना है , तो इसके लिए आवश्यक बौद्धिक क्षमता का उपयोग स्थानीय जनजाति के विकास से संबंधित विषय-जनजातीय भाषा , संस्कृति , कला ऐतिहासिक विरासत और नैसर्गिक सम्पदा मे शोध, खोज और उच्च अध्यन के लिए किया जाना अनिवार्य है''। कार्यक्रम काफी सफ़ल रहा. श्री अर्जुन सिंह की गरमामयी उपस्थित ने समारोह को भव्य बना दिया था।
लोकप्रिय नेता
इस समारोह मे भारी सख्या मे लोगो की उपस्थित, श्री अर्जुन सिंह की लोकप्रियता को दर्शा गया। छत्तीसगढ़ के करीबी जिलो,मंडला ,डिडॊरी,शहडोल, अनूपपुर , उमरिया ,सतना, रीवा,सीधी आदि जिलो से जनजातीय व अन्य समुदाय के लोगो की उपस्थिति ही इस बात का प्रतीक हॆ। भारतीय़ जनता पार्टी के स्थानीय़ सांसद, मंत्री के साथ साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ काग्रेस के कद्दावर नेता समारोह मे उपस्थित थे।
कुनबो मे बटी काग्रेस के नजारे भी देखने को मिले
पचॊरी व अजय सिंह के बीच दूरी भी समारोह के बाद देखने को मिली. समारोह के सफलता से उत्पन्य खिन्नता पचॊरी के चेहरे मे साफ नजर आ रही थी . अजय जहा जनता से घिरे नजर आये वही पचॊरी संगठन के चन्द नेताओं के साथ ही दिखे। पचॊरी अभी जनता के बीच उतने जाने पहचाने नही हॆ जितना अजय। अर्जुन सिंह के वापसी के समय पचॊरी समर्थक नेताओं खासकर पार्टी के शहडोल जिलाध्यक्ष राकेश कटारे की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही।
एक अखबार मालिक की राजनीत

समारोह के बाद चाय की मे दुकान मे अखबार पढ़ते पढ़ते एक नेता जी आपे से बाहर हो गए। कारण जानने पर मालुम हुआ कि एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र ने अर्जुन सिंह के आगमन के समय उपस्थित लोगो मे उनका नाम नही छापा था । उनका कहना था कि अखबार का मालिक भी काग्रेसी नेता है , यह अखबार वही लिखता है जो इसका मालिक चाहता है। कोलमाफियाओ के नाम हॆ जो नही थे। वही उपस्थित दूसरे नेता ने कहा वे लोग पॆसा देते हॆ तुमसे क्या मिलेगा।
राम शर्मा

शनिवार, 19 अप्रैल 2008

एक नेक सलाह राहुल गाधी को ..............


एक नेक सलाह राहुल गाधी को



विसारत मे मिली राजनीत ,ऒर पापा , आजी नाना की राहो मे चलने की ललक आपमे साफ दिखती हॆ. पर आपकी दशा एक भटके हुए मुसाफिर के जॆसी हॆ। जिसके पास न अपनी मॊलिक सोच हॆ न सही सलाहकार। आदिवासियो के घर मे अचानक पहुच कर खाना खाने ,हरिजनो के आसूं पोछ कर उनकी सहानुभूति बटोरने की कवायत बडी पुरानी हो चुकी हॆ,ऒर आप के पूर्वज इन टोटको के मत्थे काफी दिन सत्ता का स्वाद चख चुके हॆ। आज आप को सच के धरातल मे खडे होकर जन भावनाओ के अनरूप ,जनता से जुडॆ लोगो को साथ लेकर चलने पर ही कोई सफलता हासिल हो सकती है । संगठन की मजबूती ही सत्ता के करीब ले जा सकती हॆ । बिरदावली गाने वाले लोगो के मत्थे संग्राम नही जीते जाते । कुनबो मे बटी काग्रेस का ग्रामीण स्तर का संगठन समाप्त हो चुका हॆ, बचा हॆ नेताओ के चमचो की जमात। संगठन शहरी क्षेत्र व पॆसे वालो के जेब की धरोहर बन चुका हॆ , सच जानना हॆ तो चमचो की जमात छोड कर जनता के बीच जाइये ,सच स्वमेव सामने आ जायेगा, ऒर शायद उसी दिन आपको सही राजनीत करने की दिशा भी प्राप्त हो जायेगी। क्रमश:...................



राम

बुधवार, 16 अप्रैल 2008

शिवराज के शिकंजे मे पचौरी का पंजा

शिवराज के शिकंजे मे पचॊरी का पंजा





आख़िर सिर मुडाते ओले वाली बात चारितार्थ हो गई ,सुरेश पचौरी की अध्यक्षता मे काग्रेस बैतूल का चुनाव हार गई । भाई जो व्यक्ति ख़ुद कभी चुनाव नही जीत सका उसके बल मे सोनिया मैया मध्य प्रदेश से बेटे राहुल को प्रधान मंत्री बनाने के लिए बहुमत कहा से जुटा पायेगी । पचौरी के रहते तो इस प्रदेश की बजाय उन्हें दूसरे प्रदेश मे ध्यान देना चाहिये । शायद उन्हें समझाया गया था कि बाजपेईके भा.जा.पा.नेत्रृत्व से हटने कर बाद ब्राम्हण वोट काग्रेस के झोली मे डालने के साथ साथ बा.सा.पा.के साथ जाने वाले वोट भी रोक लेगे। पचौरी जी दस जनपथ की हाजरी लगा कर मंत्री पद पाया जा सकता है जनता से वोट नही । फिलहाल आप के पंजे मे शिवराज की पकड़ तगडी लग रही है आगे भगवान मालिक क्यू कि अब पार्टी के अंदर आप के विरोधियो को भी बोलने मौका मिल गया है ...........क्रमश:
राम

हमारे देश के नेता,बनाम हमारी राजनैतिक व्यवस्था ..........


इंडिया यानी भारत,भारत की राजनैतिक व्यवस्था के आधार स्तम्भ हमारे नेता। कैसे है हमारे नेता और कैसी है हमारी राजनैतिक व्यवस्था जानने की कोशिश करते है ,और प्रारंभ करते आज से अपनी खोजी यात्रा। है न आप हमारे साथ ...........
नेता .........कही पढ़ा था कि ''ख़बर मिली कि एक नेता कही खो गया है.किसी ने कहा कही वो आदमी तो नही हो गया है।बाढ़ पीडतो को देखने गया था , बाढ़ को देख पानी पानी तो नही हो गया है ''।
एक ब्लॉग लेखक है , विक्रम सिंह, भाई साहब लिखते है ,''नेता मदारी मे फर्क इतना होता है, मदारी लोगो तमाशा दिखा कर कमाता है, नेता लोगो को तमाशा बना कर कमाता है '' तो ऐसे है महान हमारे नेता । कोटि कोटि नमन के पात्र....
क्रमश: ...........
राम