

राहुल गांधी के आदिवासी प्रेम के बारे में क्या सोचते हैं,इस समुदाय के नेता ?
खितौली की सभा के पश्चात मैने वही कुछ आदिवासी समुदाय के लोगो से बात की । काग्रेस पार्टी के विधायक रह चुके एक आदिवासी नेता का कहना था कि ''राहुल जी का यह कैसा आदिवासी प्रेम है , पंडित ,ठाकुरों को गले लगाकर आदिवासियों के हित की बात उठाते हैं । मंच पर उन्होंने किसी आदिवासी नेता को महत्त्व नही दिया । सारा श्रेय तो लूट लिया सामान्य वर्ग के मंचासीन नेताओं ने । जब की सभा मे भीड़ राहुल के नाम मे जुटी थी , और उन्हें इकठ्ठा करने मे हम लोगो का हाथ था ।अपने बदॊलत ये पाच सॊ आदमी भी इकट्ठा नही कर सकते हॆं। और दिखा ऎसे रहे थे,कि सारा किया धरा उन्ही का हो । ये पचौरी तो हम लोगो को महत्त्व ही नही देता,सिर्फ पंडितो को जानता है । संगठन और सत्ता में हमारी भूमिका खाना पूर्ति भर के लिए है । अभी चुनाव आ रहा है , हमे टिकट के लिए इन्ही लोगो की चमचागीरी करनी पड़ेगी । और जो इन्हे खुस कर लेगा,उसी आदिवासी को टिकट मिल जायेगी "। उनका कहना कि ”अगर राहुल गांधी वास्तव मे आदिवासियों का विकास चाहते हैं, तो उन्हें इस वर्ग के योग्य व्यक्तियो को आगे लाना होगा । आदिवासी सीटो मे पार्टी टिकट वितरण के समय उम्मीदवारों का चयन आदिवासी समुदाय के नेता करे, या फिर सोनिया गांधी खुद करे”। एक नेता जी का कहना था की इस बार गोडवाना गणतंत्र पार्टी को कम करके नही आका जा सकता ।
राम शर्मा

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